रविवार 1 नवंबर 2026 - 19:06
शिक्षा, लेखन, धार्मिक दूरदर्शिता और राष्ट्रीय नेतृत्व के क्षेत्र में मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी की सेवाएँ अविस्मरणीय: शेख़ ग़ुलाम रसूल नूरी

श्रीनगर के गुंड हसी बट में कश्मीर की इस्लामी एकता के नेता स्वर्गीय मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी की चौथी बरसी के अवसर पर एक दिवसीय मजलिस-ए-तरहीम का आयोजन किया गया। इसमें विद्वानों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर उनकी धार्मिक, शैक्षणिक, लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में दी गई सेवाओं को याद किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने मदीना पब्लिक स्कूलों की स्थापना और नई पीढ़ी की शिक्षा एवं تربियत के लिए उनके संघर्ष को भी सराहा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर के गुंड हसी बट में कश्मीर की इस्लामी एकता के नेता, प्रसिद्ध लेखक एवं साहित्यकार, मदीना पब्लिक स्कूल्स कश्मीर के संस्थापक, प्रभावशाली वक्ता और प्रतिष्ठित राजनीतिक एवं सामाजिक नेता हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन स्वर्गीय मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी की चौथी बरसी के अवसर पर एक दिवसीय मजलिस-ए-तरहीम आयोजित की गई।

इस मजलिस में घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, उलेमा और उनके चाहने वालों ने भाग लिया। सभी ने स्वर्गीय नेता की धार्मिक, शैक्षणिक, शिक्षा संबंधी और सामुदायिक सेवाओं को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

मजलिस का आरंभ सामूहिक तिलावते कुरआन से हुआ। इसके बाद दिनभर ज़ाकिरों और मर्सियाख्वानों ने बारगाहे अहलेबैत (अ) में अपनी श्रद्धा के पुष्प अर्पित किए। मजलिस के दौरान स्वर्गीय मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी के जीवन, उनके वैचारिक एवं सैद्धांतिक संघर्ष तथा मिल्लत के निर्माण और मार्गदर्शन के लिए की गई सेवाओं को याद किया गया।

इस अवसर पर शहीद रहबर-ए-मुअज्जम हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई को भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया तथा उनकी धार्मिक, वैचारिक और क्रांतिकारी सेवाओं को श्रद्धांजलि दी गई। पूरा माहौल शोक और श्रद्धा के भावों से ओतप्रोत रहा।

शिक्षा, लेखन, धार्मिक दूरदर्शिता और राष्ट्रीय नेतृत्व के क्षेत्र में मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी की सेवाएँ अविस्मरणीय: शेख़ ग़ुलाम रसूल नूरी

मजलिस-ए-तरहीम को संबोधित करते हुए घाटी के प्रमुख धर्मगुरु हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन शेख़ ग़ुलाम रसूल नूरी ने स्वर्गीय नेता के व्यक्तित्व और उनकी बहुआयामी सेवाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी केवल एक धार्मिक या राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि वे एक विचारशील, लेखक, दूरदर्शी और गहरी समझ रखने वाले व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन मिल्लत के वैचारिक, शैक्षणिक और धार्मिक विकास के लिए समर्पित कर दिया था।

उन्होंने कहा कि मौलाना का संघर्ष किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने शिक्षा, प्रचार-प्रसार, लेखन, रचनाकर्म और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी शैक्षणिक सेवाओं का एक महत्वपूर्ण अध्याय मदीना पब्लिक स्कूल्स की स्थापना है। इसके माध्यम से उन्होंने घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा का प्रकाश फैलाने का व्यावहारिक प्रयास किया।

वे इस सच्चाई से भलीभांति परिचित थे कि किसी भी कौम की तरक्की और सम्मान का रास्ता शिक्षा एवं तरबीयत से होकर गुजरता है। यही कारण था कि उन्होंने नई पीढ़ी की शैक्षणिक और नैतिक तरबीयत को अपनी प्राथमिकताओं में विशेष स्थान दिया।

शिक्षा, लेखन, धार्मिक दूरदर्शिता और राष्ट्रीय नेतृत्व के क्षेत्र में मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी की सेवाएँ अविस्मरणीय: शेख़ ग़ुलाम रसूल नूरी

शेख़ नूरी ने आगे कहा कि स्वर्गीय मौलाना अब्बास अंसारी ने अपने भाषणों, लेखों और व्यावहारिक संघर्ष के माध्यम से कुरआन तथा शिक्षाते अहलेबैत (अ) के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी लेखनी वैचारिक गहराई, उनके भाषण धार्मिक एवं सामुदायिक चेतना और उनका संघर्ष मिल्लत के प्रति उनकी असाधारण प्रतिबद्धता का परिचायक था।

उन्होंने न केवल अपने दौर की वैचारिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक वैचारिक और व्यावहारिक विरासत छोड़ी।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी नेता की वास्तविक महानता का आकलन उसके पद या प्रसिद्धि से नहीं, बल्कि उन प्रभावों से किया जाता है, जो वह अपने समाज और आने वाली पीढ़ियों के विचारों तथा जीवन पर छोड़ जाता है। मौलाना मुहम्मद अब्बास अंसारी का जीवन और उनकी सेवाएँ इसी सच्चाई का प्रमाण हैं।

उनका शैक्षणिक, लेखन, धार्मिक और कल्याणकारी संघर्ष कश्मीर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।

मजलिस के अंत में स्वर्गीय नेता को सवाब पहुँचाने, उनके दर्जात की बुलंदी और मग़फ़िरत के लिए सामूहिक दुआ की गई।

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